भारत सशस्त्र हिंसा आकलन

भारत सशस्त्र हिंसा आकलन (इंडियन आर्म्ड वायलेंस असेसमेंट) भारत में सशस्त्र हिंसा पर सभी रूपों में सुनियोजित शोध को प्रोत्साहित करता है। ये प्रोजेक्ट सशस्त्र हिंसा से जुड़े सभी मुद्दों, जैसे सीमापार आतंकवाद, घरेलू विद्रोह और उग्रवादी अलगाववाद से लेकर लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा के ख़तरे, सामाजिक संघर्ष, और महिलाओं के प्रति हिंसा पर भी ज़ोर डालता है। आईएवीए के पास सशस्त्र हिंसा पर मौलिक शोध, हिंसा से जुड़ी ख़बरें, सहयोगी संस्थानों द्वारा किए जानेवाले शोध और नए अंतरराष्ट्रीय शोधों पर जानकारी उपलब्ध है। आईएवीए के बारे में...

  

भारत सशस्त्र हिंसा आकलन के विषय में

Mumbai, 2008
Mumbai, 26-29 November 2008

2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 120 करोड़ है, जो विश्व की आबादी का छठा हिस्सा है। 2030 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होगा। हालांकि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में हिंसा का स्तर दुनिया के बाकी देशों से बहुत कम है। बावजूद इसके देश में हर साल 32,000 से 38,000 लोग किसी ना किसी तरह की हिंसा का शिकार होकर मरते हैं, जो पूरी दुनिया में हिंसा में होनेवाली मौतों का पांच प्रतिशत है। देश के कई हिस्सों में अपराधों की दर गिरी है, लेकिन हिंसा कई क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ी है, ख़ासकर आतंकवाद और उग्रवाद प्रभावित इलाकों में और वहां, जहां राजनीतिक, जाति और धार्मिक हिंसा के अलावा महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले भी प्रकाश में आए हैं।

आतंकवाद, अलगाववाद और अवैध हथियारों की तस्करी जैसी समस्याएं भारत में पड़ोसी देशों से होकर भी आती हैं। भारत के कई पड़ोसी देशों, जैसे अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और म्यांमार, में सशस्त्र हिंसा चलती रही है, या फिर श्रीलंका जैसा देश अभी-अभी लंबे संघर्ष से उबरा है। इन चुनौतियों के बावजूद इस क्षेत्र में सशस्त्र हिंसा को रोकने और कम करने की दिशा में बहुत कम प्रयास हो रहे हैं।

सशस्त्र हिंसा को प्रभावित करनेवाले अन्य कारकों में घरेलू चुनौतियां भी शामिल हैं। इनमें क्षेत्रीय अलगाववाद, देशभर में तेज़ी से फैल रहा नक्सलवादी आंदोलन, महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा, सुनियोजित अपराध और ड्रगट्रैफिकिंग, राजनीतिक उथल-पुथल, जातिगत हिंसा और सामुदायिक तनाव शामिल हैं। ये चुनौतियां बहुत महत्वपूर्ण और बड़ी हैं: माओवादी विद्रोह ही पूरे देश के एक-तिहाई हिस्से में फैल चुका है। साथ ही, देश के कुछ शहरों में अत्यधिक हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी शामिल है।

भारत सशस्त्र हिंसा आकलन (इंडिया आर्म्ड वायलेंस असेसमेंट या आईएवीए) की स्थापना 2010 में द ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट, जिनीवा के अंग और एक शोध संस्था स्मॉल आर्म्स सर्वे द्वारा की गई। दिल्ली में मौजूद आईएवीए भारतीय हिंसा के कारणों और विभिन्न तथ्यों पर एक व्यापक रूपरेखा पेश करता है। ये प्रोजेक्ट सबूतों पर आधारित विश्लेषण को प्रोत्साहित करता है, अधिकारियों और गैर-सरकारी जानकारों तथा सामाजिक विज्ञान शोध समुदायों को एक मंच पर लेकर आता है। इस तरीके से ये असुरक्षा के कारणों और नतीजों की बेहतर समझ को सुगम बनाता है और शोध और नीतियों के बीच बेहतर सामंजस्य विकसित करता है। आईएवीए सशस्त्र हिंसा पर भारतीय नज़रिए को वैश्विक परिदृश्य से बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में प्रयासरत है और ये सुनिश्चित कराना चाहता है कि देश शोध और नीति-निर्धारण की अंतरराष्ट्रीय विचारधारा के सभी लाभ उठाए।